देश में महंगाई अभी नियंत्रण में जरूर दिखाई दे रही है, लेकिन इसकी स्थिरता को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। HDFC Bank की ताजा रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2026 में खुदरा महंगाई दर (CPI) 3.40 प्रतिशत रही, जो फरवरी के 3.2 प्रतिशत से थोड़ा अधिक है। यह स्तर अभी भी आरामदायक माना जा रहा है, लेकिन लगातार तीसरे महीने बढ़त का रुझान भविष्य के लिए संकेत दे रहा है कि महंगाई पर दबाव धीरे-धीरे बढ़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक ऊर्जा कीमतों में उछाल इसका प्रमुख कारण बन रहा है, खासकर एलपीजी, गैस और बिजली महंगी होने से ऊर्जा महंगाई 1.7 प्रतिशत तक पहुंच गई है। हालांकि इसका पूरा असर उपभोक्ताओं तक अभी नहीं पहुंचा है, जिससे कुल महंगाई सीमित बनी हुई है।
दूसरी तरफ खाद्य और पेय पदार्थों की महंगाई भी बढ़कर 3.7 प्रतिशत हो गई है, जो आने वाले समय में आम लोगों की जेब पर असर डाल सकती है। अगर यह रुझान जारी रहा, तो रोजमर्रा की चीजें और महंगी हो सकती हैं। वहीं कोर महंगाई (खाद्य और ईंधन को छोड़कर) घटकर 3.3 प्रतिशत पर आ गई है, जिसमें सोना-चांदी जैसी कीमती धातुओं की कीमतों में नरमी एक अहम कारण रही है, लेकिन यह राहत लंबे समय तक टिकेगी, इसकी गारंटी नहीं है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वित्त वर्ष 2027 में औसत महंगाई 4.9 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, खासकर अगर वैश्विक तेल कीमतें बढ़ती रहीं और मानसून कमजोर रहा। कमजोर मानसून को सबसे बड़ा जोखिम बताया गया है, क्योंकि इससे कृषि उत्पादन प्रभावित होगा और खाद्य महंगाई तेजी से बढ़ सकती है। वहीं Reserve Bank of India फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए है और रेपो रेट (5.25 प्रतिशत) में तुरंत बदलाव की संभावना कम है। बॉन्ड मार्केट ने भी इन आंकड़ों पर ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं दी है और 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड करीब 6.94 प्रतिशत पर स्थिर बनी हुई है, जिससे संकेत मिलता है कि बाजार फिलहाल स्थिति को संतुलित मान रहा है।
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