भारत स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में तेजी से आगे बढ़ते हुए अब Small Modular Reactor (SMR) पर बड़ा दांव लगाने जा रहा है। सरकार अगले 3 से 6 महीनों में 220 मेगावाट क्षमता वाले BSMR-200 प्रोजेक्ट के लिए टेंडर जारी करने की तैयारी में है, जिसे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इस परियोजना को Bhabha Atomic Research Centre और Nuclear Power Corporation of India Limited मिलकर विकसित कर रहे हैं, जिसकी अनुमानित लागत करीब 5,960 करोड़ रुपये है और निर्माण में 60 से 72 महीने लग सकते हैं।
SMR तकनीक की खासियत यह है कि इसे छोटे आकार में तेजी से स्थापित किया जा सकता है और जरूरत के अनुसार अलग-अलग स्थानों पर दोहराया जा सकता है, जिससे बिजली उत्पादन में लचीलापन आता है। प्रस्तावित BSMR-200 को एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में तैयार किया जाएगा, जो भविष्य में देशभर में ऐसे कई रिएक्टर लगाने का रास्ता खोलेगा। सरकार इस प्रोजेक्ट में विदेशी कंपनियों को भी शामिल होने का मौका दे रही है, हालांकि उन्हें भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी करनी होगी, जिससे वैश्विक तकनीक और स्थानीय अनुभव का संतुलन बन सके।
हालिया नीतिगत बदलावों और न्यूक्लियर एनर्जी मिशन के तहत SMR विकास के लिए 20,000 करोड़ रुपये के निवेश ने इस दिशा को और मजबूती दी है। बढ़ती ऊर्जा मांग के बीच भारत कम-कार्बन और भरोसेमंद बिजली उत्पादन पर जोर दे रहा है, और SMR जैसी आधुनिक तकनीकें इस लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। कुल मिलाकर, यह पहल भारत को स्वच्छ और स्थायी ऊर्जा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है।
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