राजस्थान शिक्षा विभाग ने छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य के सभी सरकारी बालिका विद्यालयों और छात्रावासों में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। नए नियमों के अनुसार केवल वही लोग छात्राओं से मिल सकेंगे, जिनका नाम पहले से स्कूल या हॉस्टल रिकॉर्ड में अभिभावक या अधिकृत संरक्षक के रूप में दर्ज होगा। इसके लिए मिलने आने वालों का नाम और फोटो पहले से रजिस्टर किया जाएगा, ताकि किसी तरह की पहचान संबंधी गलती न हो सके।इस व्यवस्था के तहत किसी भी अनजान व्यक्ति को बिना पूर्व अनुमति और सत्यापन के परिसर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। स्कूलों के प्रधानाचार्य और छात्रावास वार्डन को निर्देश दिए गए हैं कि वे आने वाले हर व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित करें और पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड रखें। यह कदम खासतौर पर छात्राओं की सुरक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
इस फैसले के पीछे राज्य में महिलाओं और बालिकाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध भी एक बड़ी वजह हैं। National Crime Records Bureau (2023) के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में महिलाओं से जुड़े अपराधों के हजारों मामले सामने आए हैं, जिनमें छेड़छाड़, अपहरण और दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। ऐसे में सरकार ने स्कूल और हॉस्टल को पूरी तरह सुरक्षित क्षेत्र बनाने की दिशा में यह सख्त कदम उठाया है।राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने बताया कि यह नई व्यवस्था उनके पुराने अनुभवों पर आधारित है। जब वे सामाजिक अधिकारिता मंत्री थे, तब भी छात्रावासों में इसी तरह के नियम लागू किए गए थे, जहां मिलने आने वालों की फोटो और पहचान पत्र का मिलान अनिवार्य किया गया था। उस मॉडल के सफल रहने के बाद अब इसे पूरे राज्य में लागू किया जा रहा है।सरकार का मुख्य उद्देश्य यह है कि छात्राओं को एक सुरक्षित और भरोसेमंद वातावरण मिले, जिससे अभिभावक बिना किसी डर के अपनी बेटियों को पढ़ाई के लिए स्कूल और हॉस्टल भेज सकें। यह कदम शिक्षा व्यवस्था में सुरक्षा को मजबूत करने और बाहरी असामाजिक तत्वों के हस्तक्षेप को पूरी तरह रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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