संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े अहम विधेयकों पर जोरदार बहस देखने को मिली, जहां एक तरफ प्रधानमंत्री Narendra Modi और गृह मंत्री Amit Shah ने इन विधेयकों का मजबूती से समर्थन करते हुए कहा कि इससे किसी भी राज्य, खासकर दक्षिण भारत के राज्यों के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने इन प्रस्तावों को लेकर गंभीर सवाल उठाए और आशंकाएं जताईं। सरकार का कहना है कि महिला आरक्षण से देश की ‘नारी शक्ति’ को सशक्त बनाने का बड़ा कदम उठाया जा रहा है, जिसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलेगा, जबकि परिसीमन प्रक्रिया को लेकर भी सरकार ने साफ किया कि इससे दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी घटेगी नहीं बल्कि बढ़ेगी। गृह मंत्री अमित शाह ने आंकड़ों के जरिए समझाने की कोशिश की कि कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल जैसे राज्यों की सीटें बढ़ेंगी और उनका प्रतिशत प्रतिनिधित्व लगभग स्थिर रहेगा या हल्का बढ़ेगा, जिससे क्षेत्रीय संतुलन बना रहेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में विपक्ष को चेतावनी दी कि अगर इस तरह के सामाजिक सुधारों में राजनीति की जाएगी तो देश की महिलाएं इसे माफ नहीं करेंगी, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ-हानि के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया कि परिसीमन के जरिए राजनीतिक संतुलन बदलने की कोशिश हो रही है और महिला आरक्षण विधेयक को एक राजनीतिक रणनीति के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने यहां तक दावा किया कि मत विभाजन के दौरान सरकार को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। कुल मिलाकर, यह बहस केवल एक विधेयक तक सीमित नहीं रही बल्कि इसमें देश के संघीय ढांचे, लोकतांत्रिक संतुलन और महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी जैसे बड़े मुद्दे केंद्र में आ गए हैं, जिनका असर आने वाले चुनावों और राजनीतिक परिदृश्य पर भी देखने को मिल सकता है।
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