पश्चिम एशिया तनाव के बीच IMF की भारत को सलाह, बफर्स का समझदारी से करें इस्तेमाल

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उससे जुड़े वैश्विक आर्थिक जोखिमों को देखते हुए International Monetary Fund ने भारत को अपने राजकोषीय बफर्स का सावधानी और रणनीतिक तरीके से उपयोग करने की सलाह दी है। IMF के एशिया-प्रशांत विभाग के निदेशक Krishna Srinivasan ने कहा कि अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो ऊर्जा संकट और महंगाई का दबाव बढ़ सकता है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार को व्यापक खर्च बढ़ाने के बजाय लक्षित समर्थन (targeted support) पर ध्यान देना चाहिए, यानी मदद केवल उन्हीं लोगों और कंपनियों तक पहुंचे जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत है और जो आर्थिक रूप से व्यवहार्य हैं। IMF ने हाल ही में भारत के लिए वित्त वर्ष 2026-27 का GDP ग्रोथ अनुमान हल्का बढ़ाकर 6.5% कर दिया है, जो पहले 6.4% था, जिससे यह संकेत मिलता है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है।

 रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पश्चिम एशिया के तनाव से होने वाले संभावित नुकसान को कुछ हद तक अमेरिकी टैरिफ में कमी से संतुलित किया जा सकता है, जिससे भारतीय निर्यात को राहत मिल सकती है। कुल मिलाकर IMF का संदेश साफ है कि भारत को मौजूदा वैश्विक अस्थिरता के बीच वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए अपने संसाधनों का उपयोग सोच-समझकर करना होगा, ताकि आर्थिक स्थिरता और विकास दोनों को संतुलित रखा जा सके।

Manisha Saini
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