पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत के व्यापार पर साफ दिखाई देने लगा है, जहां मार्च महीने में देश का वस्तु निर्यात 7.44% घटकर 38.92 अरब डॉलर रह गया, जो पिछले पांच महीनों की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। यह गिरावट मुख्य रूप से उस समय आई जब अमेरिका, इजरायल और Iran के बीच जारी संघर्ष के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई और खास तौर पर पश्चिम एशिया के लिए निर्यात में भारी कमी दर्ज की गई। आम तौर पर भारत हर महीने इस क्षेत्र को करीब 6 अरब डॉलर का निर्यात करता है, लेकिन हालिया तनाव के चलते यह घटकर लगभग 2 से 2.5 अरब डॉलर तक सिमट गया, जिससे कुल एक्सपोर्ट पर दबाव बना। हालांकि इसी दौरान आयात में भी गिरावट देखने को मिली, जो 6.51% घटकर 59.59 अरब डॉलर रह गया, और इसका एक सकारात्मक असर यह हुआ कि देश का व्यापार घाटा घटकर 9 महीनों के निचले स्तर 20.67 अरब डॉलर पर आ गया। इसके पीछे कच्चे तेल और सोने के आयात में आई कमी को अहम वजह माना जा रहा है।
पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें तो वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत का कुल निर्यात 0.93% बढ़कर रिकॉर्ड 441.78 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जबकि आयात 7.45% बढ़कर 775 अरब डॉलर रहा, जिससे व्यापार घाटा बढ़कर 333.2 अरब डॉलर हो गया। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, वस्तुओं और सेवाओं को मिलाकर कुल निर्यात 860 अरब डॉलर के पार पहुंचना भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है, भले ही वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में हालात जल्द नहीं सुधरे, तो अप्रैल और आने वाले महीनों में भी निर्यात पर दबाव बना रह सकता है, लेकिन भारत की विविध निर्यात क्षमता और मजबूत मांग के चलते लंबी अवधि में स्थिति संभलने की उम्मीद भी बनी हुई है।
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