संकट के बीच भी नहीं घटेगा प्रवासियों से आने वाला पैसा, RBI ने जताई उम्मीद

पश्चिम एशिया में जारी संकट के बावजूद भारत को प्रवासियों से मिलने वाला पैसा (रेमिटेंस) स्थिर रहने की उम्मीद है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत सहारा मिलता रहेगा। Reserve Bank of India की डिप्टी गवर्नर Poonam Gupta ने मौद्रिक नीति के बाद कहा कि मौजूदा तनाव के बावजूद खाड़ी देशों में कामगारों की मांग बढ़ सकती है, जिससे धनप्रेषण पर कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने यह भी बताया कि अब भारत में रेमिटेंस का स्रोत अधिक विविध हो गया है—यानी सिर्फ खाड़ी देशों पर निर्भरता कम हुई है और United States, United Kingdom और Singapore जैसे देशों से भी बड़ी मात्रा में पैसा आ रहा है। आंकड़ों के अनुसार FY26 में अब तक 107 अरब डॉलर से ज्यादा की रकम भारत भेजी जा चुकी है, जिसमें सबसे बड़ा योगदान अमेरिका (27.7%) का है, जबकि गल्फ देशों की हिस्सेदारी घटकर 33.8% रह गई है। वहीं Sanjay Malhotra ने चेतावनी दी कि कमजोर वैश्विक वृद्धि से बाहरी मांग और रेमिटेंस पर कुछ दबाव आ सकता है। IDFC First Bank की अर्थशास्त्री Gaura Sen Gupta के अनुसार, संकट के दौरान लोग एहतियातन ज्यादा पैसा घर भेज सकते हैं, लेकिन लंबी अवधि में अगर कामगारों की वापसी होती है तो असर दिख सकता है। कुल मिलाकर, सेवा निर्यात और स्थिर रेमिटेंस के चलते भारत का बाहरी सेक्टर मजबूत बना हुआ है और चालू खाता घाटा भी नियंत्रित स्तर पर रहने की उम्मीद है।


Manisha Saini
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