भारत सोलर सेक्टर में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए अब पूरी वैल्यू चेन पर फोकस कर रहा है, और इसी कड़ी में सरकार पॉलिसिलिकन के लिए नई PLI (Production Linked Incentive) योजना लाने पर विचार कर रही है। Ministry of New and Renewable Energy और Ministry of Finance मिलकर इस योजना पर काम कर रहे हैं, ताकि देश में पॉलिसिलिकन का घरेलू उत्पादन बढ़ाया जा सके। पॉलिसिलिकन सौर पैनल बनाने का सबसे अहम कच्चा माल है और इसका 95% से ज्यादा उपयोग सोलर इंडस्ट्री में होता है।दरअसल, भारत ने पिछले कुछ वर्षों में सोलर मॉड्यूल और सेल निर्माण क्षमता में तेजी से विस्तार किया है—मॉड्यूल क्षमता करीब 172 गीगावॉट और सेल क्षमता लगभग 65 गीगावॉट तक पहुंच चुकी है। लेकिन अभी भी पॉलिसिलिकन और कुछ अन्य शुरुआती घटकों के लिए देश को आयात पर निर्भर रहना पड़ता है, खासकर China पर, जिसकी इस सेक्टर में 90% से ज्यादा वैश्विक हिस्सेदारी है।नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव Santosh Kumar Sarangi के अनुसार, भारत ने मिड और डाउनस्ट्रीम (जैसे सेल और मॉड्यूल) में तो अच्छी प्रगति कर ली है, लेकिन अपस्ट्रीम यानी पॉलिसिलिकन और वेफर जैसे सेगमेंट में अभी भी गैप है। इसी गैप को भरने के लिए PLI योजना लाई जा सकती है।
सरकार पहले ही ALMM (Approved List of Models and Manufacturers) जैसी नीतियों के जरिए घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे रही है, और हाल ही में इंगट्स और वेफर्स के लिए नई सूची भी जारी की गई है, जिसके तहत 2028 से सौर परियोजनाओं में घरेलू सप्लाई को प्राथमिकता दी जाएगी।कुल मिलाकर, अगर पॉलिसिलिकन के लिए PLI योजना लागू होती है, तो भारत सोलर सेक्टर में “माइन से मॉड्यूल” तक पूरी सप्लाई चेन बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाएगा। इससे न सिर्फ आयात पर निर्भरता घटेगी, बल्कि देश वैश्विक सोलर मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की ओर भी तेजी से बढ़ेगा।
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