पश्चिम एशिया संकट के बीच आम जनता को राहत देने के लिए Government of India ने डीजल और पेट्रोल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में कटौती की है, लेकिन इसका असर सरकारी खजाने पर साफ दिख रहा है। अनुमान के मुताबिक, सिर्फ 15 दिनों में ही सरकार को करीब ₹5,500 करोड़ का राजस्व नुकसान उठाना पड़ेगा।
इस फैसले के तहत उत्पाद शुल्क में कटौती से लगभग ₹7,000 करोड़ का नुकसान होगा, हालांकि डीजल और विमानन ईंधन (ATF) पर निर्यात शुल्क लगाने से करीब ₹1,500 करोड़ की भरपाई हो जाएगी। इसके अलावा, सरकार ने 3 महीने के लिए करीब 40 पेट्रोलियम उत्पादों पर सीमा शुल्क भी हटा दिया है, जिससे अतिरिक्त ₹1,800 करोड़ का असर पड़ेगा।
अगर यह राहत पूरे वित्त वर्ष 2026-27 तक जारी रहती है, तो कुल मिलाकर राजकोष को लगभग ₹1.32 लाख करोड़ का बड़ा झटका लग सकता है, जो बजट अनुमानित उत्पाद शुल्क संग्रह का करीब एक-तिहाई है।ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत में कुल उत्पाद शुल्क संग्रह का लगभग 90% हिस्सा पेट्रोलियम उत्पादों से आता है, क्योंकि ज्यादातर अन्य वस्तुएं Goods and Services Tax (GST) के दायरे में आ चुकी हैं। ऐसे में पेट्रोल-डीजल पर टैक्स में कटौती का सीधा असर सरकार की आय पर पड़ता है।कुल मिलाकर, यह कदम अल्पकाल में महंगाई और ईंधन कीमतों को नियंत्रित करने के लिए जरूरी माना जा रहा है, लेकिन लंबे समय में यह सरकार के वित्तीय संतुलन पर दबाव बढ़ा सकता है।