रफ्तार में भारतीय उद्योग फरवरी में औद्योगिक उत्पादन बढ़ा, विनिर्माण क्षेत्र ने दिखाई मजबूती

फरवरी 2026 में भारत के औद्योगिक उत्पादन में हल्का सुधार देखने को मिला और यह बढ़कर 5.2% हो गया, जो जनवरी के मुकाबले 10 आधार अंक ज्यादा है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जनवरी का अनुमान भी 4.8% से बढ़ाकर 5.1% कर दिया गया है, जिससे यह साफ है कि उद्योगों की स्थिति धीरे-धीरे सुधर रही है। इस सुधार की सबसे बड़ी वजह विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) सेक्टर है, जिसका औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में लगभग 78% हिस्सा है। कम बेस (पिछले साल का कमजोर प्रदर्शन) का भी इसमें योगदान रहा है। हालांकि, कुल IIP इंडेक्स फरवरी में घटकर 159 पर आ गया, जो जनवरी में 169.9 था, यानी ग्रोथ के बावजूद कुल उत्पादन स्तर में थोड़ी कमजोरी दिखी।

सेक्टर के हिसाब से देखें तो विनिर्माण उत्पादन में फरवरी में 6% की सालाना बढ़त हुई, जो जनवरी के 5.3% से ज्यादा है। चालू वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों में यह वृद्धि 5% रही है, जो पिछले साल की समान अवधि के 4.1% से बेहतर है। वहीं बिजली उत्पादन की रफ्तार धीमी होकर 2.3% रह गई, जो तीन महीने का निचला स्तर है, जबकि जनवरी में यह 5.2% थी। खनन क्षेत्र की ग्रोथ भी घटकर 3.1% रह गई है।

डिमांड के आधार पर देखें तो IIP के 6 में से 4 सेक्टरों में सुधार हुआ है, जिससे संकेत मिलता है कि अर्थव्यवस्था में मांग धीरे-धीरे मजबूत हो रही है। 23 में से 14 मैन्युफैक्चरिंग सेक्टरों में ग्रोथ दर्ज की गई, जिनमें कागज, केमिकल्स, नॉन-मेटैलिक मिनरल्स और मेटल प्रोडक्ट्स जैसे सेक्टर शामिल हैं। खास बात यह है कि बेसिक मेटल, मशीनरी, और ऑटो जैसे क्षेत्रों में दो अंकों की तेज वृद्धि हुई है, जो इंडस्ट्रियल रिकवरी का मजबूत संकेत है।

हालांकि तस्वीर पूरी तरह सकारात्मक नहीं है। 9 सेक्टरों में गिरावट भी दर्ज की गई है, जिनमें तंबाकू, परिधान (गारमेंट्स), फार्मा और लकड़ी उत्पाद शामिल हैं। तंबाकू में 17% और परिधान में 16.6% की बड़ी गिरावट चिंता का विषय है, जो निर्यात और मांग में कमजोरी का संकेत देती है।

विशेषज्ञों के अनुसार आगे का रास्ता आसान नहीं है। CRISIL की मुख्य अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव (जैसे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई चेन बाधाएं) भारतीय उद्योगों के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं। इससे कच्चे माल की लागत बढ़ सकती है और उत्पादन पर दबाव आ सकता है। कुल मिलाकर, अभी सुधार दिख रहा है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों के कारण आने वाले महीनों में औद्योगिक ग्रोथ पर अनिश्चितता बनी हुई है।


Manisha Saini
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