पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने देश में ऊर्जा संकट की आशंका को देखते हुए बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत अतिरिक्त केरोसिन (SKO) आवंटित करने का फैसला किया है, ताकि जरूरतमंद परिवारों को खाना बनाने और रोशनी के लिए कोई दिक्कत न हो। खास बात यह है कि जिन 21 राज्यों को पहले “केरोसिन मुक्त” माना जाता था, उन्हें भी इस बार इस योजना में शामिल किया गया है—यानी सरकार किसी भी संभावित कमी के लिए पहले से तैयारी कर रही है।
सरकार ने कुल 48,000 किलोलीटर अतिरिक्त केरोसिन राज्यों को दिया है और उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे जिलों में सही तरीके से इसका वितरण सुनिश्चित करें। अभी तक 17 राज्यों ने इसके लिए आदेश भी जारी कर दिए हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों जैसे हिमाचल प्रदेश और लद्दाख ने कहा है कि उन्हें इसकी जरूरत नहीं है।
ऊर्जा आपूर्ति को लेकर सरकार सिर्फ केरोसिन तक सीमित नहीं है, बल्कि पेट्रोल, डीजल और LPG की उपलब्धता बनाए रखने के लिए भी बड़े स्तर पर तैयारी की जा रही है। खासतौर पर Strait of Hormuz जैसे अहम समुद्री मार्ग पर संकट की आशंका को ध्यान में रखते हुए सप्लाई चेन को मजबूत किया जा रहा है। सरकारी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और देश में कच्चे तेल के साथ-साथ पेट्रोल-डीजल का भी पर्याप्त स्टॉक मौजूद बताया गया है।
LPG की सप्लाई बढ़ाने के लिए घरेलू उत्पादन में भी इजाफा किया गया है। 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने नॉन-डोमेस्टिक LPG वितरण के लिए दिशानिर्देश लागू कर दिए हैं, जबकि बाकी जगहों पर सरकारी तेल कंपनियां कमर्शियल सिलेंडर उपलब्ध करा रही हैं। 14 मार्च 2026 के बाद से करीब 39,368 मीट्रिक टन LPG कमर्शियल उपयोग के लिए जारी किया जा चुका है, जिससे होटल, उद्योग और अन्य व्यवसायों को राहत मिली है।
सरकार ने यह भी साफ किया है कि देश में फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। कुछ जगहों पर अफवाहों के कारण लोगों ने जरूरत से ज्यादा खरीदारी शुरू कर दी थी, जिससे पेट्रोल पंपों पर भीड़ देखने को मिली। इस पर सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।
इस बीच नरेंद्र मोदी ने भी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में लोगों से अपील की कि वे अफवाहों से दूर रहें और इस चुनौतीपूर्ण समय में एकजुट रहें। उन्होंने कहा कि भारत पहले भी कठिन परिस्थितियों से सफलतापूर्वक निपट चुका है और इस बार भी देश मिलकर इस संकट का सामना करेगा।
कुल मिलाकर, सरकार ने समय रहते कदम उठाकर यह संकेत दिया है कि ऊर्जा सप्लाई को लेकर स्थिति नियंत्रण में है। हालांकि, वैश्विक हालात अभी भी अनिश्चित हैं, इसलिए आने वाले समय में सतर्कता बनाए रखना बेहद जरूरी होगा।
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