यूरोप ने घटाई भारत से तेल खरीद निर्यात में रिकॉर्ड गिरावट कंपनियों की बढ़ी चिंता

पश्चिम एशिया और यूरोप में चल रहे युद्ध के साथ-साथ यूरोपीय संघ (EU) के नए कड़े नियमों ने भारत के ईंधन निर्यात पर बड़ा असर डाला है। कभी भारत के लिए लगभग 10 अरब डॉलर का बड़ा बाजार रहा यूरोप अब तेजी से सिकुड़ता दिख रहा है। मार्च 2026 में भारत से यूरोप को ईंधन निर्यात गिरकर सिर्फ 18,000 बैरल प्रतिदिन रह गया, जो महीने-दर-महीने करीब 80% और साल-दर-साल 94% की भारी गिरावट है। तुलना करें तो फरवरी 2026 में यह 89,000 बैरल प्रतिदिन और मार्च 2025 में 2.86 लाख बैरल प्रतिदिन था। यह गिरावट इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि जून 2020 (कोविड काल) को छोड़ दें तो यह अब तक का सबसे निचला स्तर है।

इसका असर सिर्फ यूरोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत के कुल ईंधन निर्यात पर भी पड़ा है। मार्च में कुल निर्यात करीब 12% घटकर 10 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। 2026 की पहली तिमाही में औसत निर्यात घटकर 10.9 लाख बैरल प्रतिदिन आ गया, जो पिछले साल 12.9 लाख बैरल था। इसका सीधा असर सरकार की कमाई पर भी पड़ेगा, क्योंकि डीजल और जेट ईंधन पर लगने वाले निर्यात कर से मिलने वाला राजस्व घटेगा।

इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह EU का जनवरी 2026 से लागू किया गया नियम है, जिसके तहत रूसी कच्चे तेल से बने ईंधन के आयात पर रोक लगा दी गई है। भारत की कई रिफाइनरियां सस्ता रूसी तेल इस्तेमाल करके ईंधन बनाती हैं, इसलिए यह नियम सीधे भारत के निर्यात को प्रभावित कर रहा है। खासतौर पर निजी क्षेत्र की बड़ी कंपनी Reliance Industries Limited (रिलायंस) पर इसका ज्यादा असर पड़ा है, जो यूरोप को सबसे ज्यादा ईंधन सप्लाई करती थी।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति स्थायी नहीं है। इक्रा के अनुसार, पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण सप्लाई बाधित हुई है और जब हालात सामान्य होंगे, तो यूरोप को फिर से भारत की जरूरत पड़ेगी। 2025 में यूरोप के कुल डीजल और जेट ईंधन आयात में रिलायंस की हिस्सेदारी लगभग 15% थी, जिससे यह साफ है कि भारत यूरोप के लिए एक अहम सप्लायर बना रहेगा।

इस बीच रूस-यूक्रेन संघर्ष ने भी बाजार को और अस्थिर कर दिया है। यूक्रेन द्वारा रूस के बंदरगाहों और रिफाइनरियों पर ड्रोन हमलों के बाद सप्लाई बाधित हुई है, और रूस ने भी गैसोलीन निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की योजना बनाई है। इससे वैश्विक ईंधन बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है।

कुल मिलाकर, यूरोप के नए नियम, युद्ध की स्थिति और सप्लाई चेन में बाधाओं ने भारत के ईंधन निर्यात को बड़ा झटका दिया है। फिलहाल कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती नए बाजार ढूंढना और बदलते नियमों के अनुसार खुद को ढालना है, जबकि आने वाले समय में वैश्विक हालात सुधरने पर निर्यात में फिर से सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।


Manisha Saini
1
Get In Touch

Dharmakshetra, Shiv Shakti Mandir, Babu Genu Marg,
Sector 8, Rama Krishna Puram,
New Delhi, Delhi 110022

+91 80031 98250

info@mysba.co.in

Follow Us
Useful link

About Us

Contact Us