भारत का विदेशी मुद्रा भंडार एक बार फिर मजबूत स्थिति में पहुंच गया है और 10 अप्रैल 2026 को समाप्त सप्ताह में यह 3.82 अरब डॉलर बढ़कर 700.94 अरब डॉलर हो गया। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, इससे पहले 3 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में भी भंडार में 9.06 अरब डॉलर की बड़ी बढ़ोतरी हुई थी, जिससे कुल भंडार 697.12 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। हालांकि इससे पहले कुछ हफ्तों में इसमें गिरावट देखने को मिली थी, जिसका मुख्य कारण पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव रहा। इस संघर्ष के चलते भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ा और आरबीआई को बाजार में हस्तक्षेप करते हुए डॉलर बेचने पड़े, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार घटा था। गौर करने वाली बात यह है कि 27 फरवरी 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 728.49 अरब डॉलर के अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर (ऑल-टाइम हाई) पर पहुंच गया था।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (FCA) होती हैं, जो 3.12 अरब डॉलर बढ़कर 555.98 अरब डॉलर हो गई हैं। इसमें केवल डॉलर ही नहीं बल्कि यूरो, पाउंड और येन जैसी अन्य विदेशी मुद्राओं के उतार-चढ़ाव का असर भी शामिल होता है। इसके अलावा, देश के गोल्ड रिजर्व में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है और इसका मूल्य 60.1 करोड़ डॉलर बढ़कर 121.34 अरब डॉलर हो गया है, जो आर्थिक मजबूती का संकेत देता है। वहीं, विशेष आहरण अधिकार (SDR) 5.6 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.76 अरब डॉलर हो गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की स्थिति मजबूत बनी हुई है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास भारत की आरक्षित स्थिति भी बढ़कर 4.85 अरब डॉलर हो गई है। कुल मिलाकर, हाल की बढ़ोतरी से यह साफ होता है कि गिरावट के बाद अब भारत का विदेशी मुद्रा भंडार फिर से संभल रहा है, जो देश की आर्थिक स्थिरता और वैश्विक भरोसे के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
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