पश्चिम एशिया में हालिया संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति में जो बाधा आई थी, वह अब धीरे-धीरे सामान्य हो रही है और देश में रसोई गैस (एलपीजी) की मांग भी फिर से सामान्य स्तर पर लौट आई है। इसी के साथ सरकार ने एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बड़े स्तर पर बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में काम तेज कर दिया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सड़क मार्ग से गैस ढुलाई पर निर्भरता कम करना और पाइपलाइन आधारित प्रणाली को बढ़ावा देना है, जिससे आपूर्ति ज्यादा सुरक्षित, सस्ती और भरोसेमंद बन सके।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस विनियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) ने बताया कि रिफाइनरियों और आयात टर्मिनलों को सीधे बॉटलिंग प्लांट से पाइपलाइन के जरिए जोड़ा जाएगा। इससे टैंकरों के जरिए होने वाले बड़े पैमाने पर परिवहन की जरूरत घटेगी और जोखिम भी कम होगा। इस दिशा में कई परियोजनाओं की पहचान की गई है, जिनमें चार बड़ी पाइपलाइन परियोजनाएं फिलहाल अंतिम चरण में हैं। इन परियोजनाओं पर हजारों करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा, जिससे देशभर में गैस आपूर्ति नेटवर्क को मजबूत किया जा सके।
पीएनजीआरबी का लक्ष्य है कि साल 2030 तक एलपीजी के बड़े पैमाने पर सड़क परिवहन को चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर दिया जाए। इससे न केवल लॉजिस्टिक लागत कम होगी, बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी घटेगा और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
दूसरी ओर, घरेलू स्तर पर एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के लिए भी कदम उठाए गए हैं। रिफाइनिंग प्रक्रिया में निकलने वाले पेट्रोकेमिकल उत्पादों का बेहतर उपयोग कर गैस उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, जिससे आपूर्ति की स्थिति पहले से काफी बेहतर हुई है।
सरकार के अनुसार, रोजाना लाखों गैस सिलिंडर की बुकिंग हो रही है और बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं तक समय पर डिलीवरी सुनिश्चित की जा रही है। इसके अलावा, वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति भी अब पहले के मुकाबले काफी हद तक सामान्य हो चुकी है, जिससे उद्योग और कारोबार पर दबाव कम हुआ है। कुल मिलाकर, पाइपलाइन आधारित सिस्टम पर जोर देकर सरकार देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
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