प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस लेख में भारत की नारी शक्ति को सशक्त बनाने और लोकतंत्र को अधिक समावेशी बनाने की एक बड़ी पहल पर जोर दिया गया है। उन्होंने बताया कि देश एक ऐतिहासिक क्षण की ओर बढ़ रहा है, जहां संसद महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के लिए अहम कदम उठाने वाली है। यह पहल सिर्फ एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं और उनके अधिकारों का प्रतिनिधित्व करती है, जिससे लोकसभा और विधानसभाओं में उन्हें उचित स्थान मिल सकेगा।
प्रधानमंत्री ने इस पहल को देश के उत्सवों और सकारात्मक माहौल से जोड़ते हुए कहा कि ऐसे समय में जब देशभर में विभिन्न सांस्कृतिक पर्व मनाए जा रहे हैं, यह कदम नई आशा और ऊर्जा लेकर आएगा। साथ ही उन्होंने महात्मा ज्योतिराव फुले और डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती का उल्लेख करते हुए सामाजिक न्याय और समानता के मूल्यों को याद किया, जो इस पहल की नींव हैं।
लेख में यह भी रेखांकित किया गया है कि भारत की महिलाएं हर क्षेत्र—विज्ञान, तकनीक, उद्यमिता, खेल और सशस्त्र बलों—में अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं, लेकिन राजनीतिक प्रतिनिधित्व अभी भी उनकी वास्तविक भागीदारी के अनुरूप नहीं है। पिछले वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्तीय समावेशन और बुनियादी सुविधाओं में सुधार से महिलाओं की स्थिति बेहतर हुई है, फिर भी नीति-निर्माण में उनकी हिस्सेदारी बढ़ाना जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब महिलाएं शासन और निर्णय प्रक्रिया में शामिल होती हैं, तो इससे न केवल चर्चा समृद्ध होती है बल्कि शासन की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। उन्होंने 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को ऐतिहासिक बताते हुए अब इसे लागू करने और आगामी चुनावों में इसके प्रावधानों को सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
अंत में, उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और सांसदों से इस महत्वपूर्ण कदम का समर्थन करने की अपील की। उनके अनुसार, यह किसी एक सरकार या दल का नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र का विषय है, जो भविष्य की पीढ़ियों के लिए अधिक न्यायपूर्ण, संतुलित और सशक्त लोकतंत्र की दिशा तय करेगा।
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