ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी की मजबूत ऑर्डर बुक (करीब 6.4GW) और बढ़ती डिमांड इसे आगे ग्रोथ देने में मदद करेगी। अनुमान है कि भारत में विंड टरबाइन की सालाना मांग 6-8GW बनी रह सकती है और आगे 10GW से ज्यादा भी जा सकती है। ऐसे में Suzlon Energy का मार्केट शेयर FY27 के बाद 40% तक पहुंच सकता है (अभी करीब 32%)। कंपनी की टर्नकी क्षमता और ALMM नियमों के चलते विदेशी (खासतौर पर चीनी) कंपनियों की प्रतिस्पर्धा भी कमजोर हो सकती है।
फाइनेंशियल अनुमान भी मजबूत दिख रहे हैं—FY26-30 के बीच EPS में करीब 15% CAGR और FY28 तक EBITDA लगभग ₹4300 करोड़ तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा FY32 तक कंपनी के पास लगभग ₹20,000 करोड़ का नेट कैश हो सकता है, जिसे नए सेगमेंट जैसे बैटरी एनर्जी स्टोरेज (BESS) में लगाया जा सकता है।
ऊर्जा बदलाव (Energy Transition) के संदर्भ में भी विंड एनर्जी की भूमिका अहम मानी जा रही है। भारत में मानसून के दौरान जब सोलर उत्पादन कम होता है, तब विंड एनर्जी बैलेंस बनाती है। यही वजह है कि आने वाले वर्षों में विंड पावर की हिस्सेदारी बढ़ने की उम्मीद है—FY32 तक 8% और लंबी अवधि में 15% तक।
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