भारत अब सेमीकंडक्टर सेक्टर में सिर्फ असेंबली तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि पूरी टेक्नोलॉजी पर नियंत्रण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। बजट 2027 में सरकार ने साफ संकेत दिया है कि फोकस अब चिप डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और ‘फुल-स्टैक इंडियन IP’ तैयार करने पर होगा। इसी के तहत India Semiconductor Mission 2.0 को नई गति दी गई है। SBI Research के मुताबिक, अब तक करीब 10 बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिल चुकी है, जिनमें कुल निवेश ₹1.6 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है। यह निवेश सिर्फ फैब तक सीमित नहीं, बल्कि पूरी सप्लाई चेन—कच्चे माल, इक्विपमेंट और डिजाइन—को भारत में विकसित करने पर केंद्रित है।
सरकार ने खास तौर पर रेयर अर्थ मैटेरियल और मशीनरी पर ध्यान बढ़ाया है, क्योंकि इनके बिना चिप इंडस्ट्री अधूरी रहती है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि आज मोबाइल, इलेक्ट्रिक वाहन, AI और रक्षा जैसे हर सेक्टर में सेमीकंडक्टर की अहम भूमिका है, इसलिए यह सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक जरूरत बन चुकी है। राज्यों की बात करें तो गुजरात इस रेस में सबसे आगे है, जहां निवेश ₹2 लाख करोड़ से ज्यादा बताया जा रहा है, जबकि असम, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश भी तेजी से उभर रहे हैं।
कुल मिलाकर, चिप-क्रांति 2.0 भारत के लिए बड़े बदलाव का संकेत है—इससे हाई-स्किल नौकरियां बढ़ेंगी, मैन्युफैक्चरिंग मजबूत होगी और भारत ग्लोबल सप्लाई चेन में अपनी पकड़ मजबूत कर सकेगा।
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