पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने विदेश यात्रा को पहले के मुकाबले ज्यादा अनिश्चित बना दिया है, जिसका सीधा असर भारतीय यात्रियों पर दिख रहा है। जिन फ्लाइट्स का रूट पहले खाड़ी देशों के ऊपर से जाता था, अब एयरलाइंस सुरक्षा कारणों से उन्हें बदल रही हैं, जिससे सफर लंबा हो रहा है और देरी, कनेक्टिंग फ्लाइट छूटने या कैंसिलेशन का खतरा बढ़ गया है खासतौर पर अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोप और कनाडा जाने वालों के लिए परेशानी ज्यादा हो सकती है। ऐसे हालात में ट्रैवल इंश्योरेंस लेना जरूरी तो है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है उसकी शर्तों (terms) और एक्सक्लूजन (exclusions) को समझना, क्योंकि हर स्थिति में क्लेम नहीं मिलता।
आमतौर पर अगर फ्लाइट देरी, तकनीकी खराबी, मौसम या एयरलाइन की वजह से कैंसिल होती है, तो इंश्योरेंस होटल, खाने-पीने और वैकल्पिक यात्रा जैसे खर्च कवर कर सकता है, लेकिन अगर कारण सीधे तौर पर युद्ध या सैन्य टकराव है, तो क्लेम खारिज हो सकता है। इसी तरह मिस्ड कनेक्शन पर भी तभी पैसा मिलता है जब देरी मान्य कारणों से हो और फ्लाइट्स के बीच पर्याप्त समय (अक्सर 4 घंटे) हो। अगर सरकार किसी देश के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी कर दे और उसके बाद भी यात्रा की जाए, तो बीमा कवर मिलने की संभावना कम हो जाती है। मेडिकल इमरजेंसी में इंश्योरेंस काफी मदद करता है जैसे अचानक बीमारी, एक्सीडेंट या अस्पताल में भर्ती but पहले से मौजूद बीमारियों पर आमतौर पर कवर नहीं मिलता
जब तक वे अचानक गंभीर न हो जाएं। बैगेज लॉस या देरी पर भी क्लेम मिल सकता है, लेकिन इसके लिए एयरलाइन से रिपोर्ट लेना जरूरी होता है और कुछ चीजें जैसे कैश या कीमती सामान सीमित या बाहर होते हैं। सबसे अहम बात यह है कि फ्लेक्सिबल टिकट या सामान्य इंश्योरेंस युद्ध जैसी स्थितियों को पूरी तरह कवर नहीं करते, जब तक कि cancel for any reason जैसा ऐड-ऑन न लिया जाए।
इसलिए यात्रा से पहले सिर्फ सस्ती पॉलिसी लेने के बजाय उसकी पूरी शर्तें, लिमिट और किन हालात में क्लेम नहीं मिलेगा—यह समझ लेना जरूरी है, वरना जरूरत के समय इंश्योरेंस भी काम नहीं आएगा।
Dharmakshetra, Shiv Shakti Mandir, Babu Genu Marg,
Sector 8, Rama Krishna Puram,
New Delhi, Delhi 110022
+91 80031 98250
info@mysba.co.in