अगर अलग-अलग बैंकों की बात करें तो सरकारी बैंक (PSBs) इस मामले में सबसे ज्यादा आत्मविश्वास में नजर आ रहे हैं। इनके लिए 11% से 13% या उससे ज्यादा लोन ग्रोथ की उम्मीद जताई जा रही है। इसकी वजह है बेहतर एसेट क्वालिटी, यानी खराब कर्ज (NPA) में कमी, मजबूत पूंजी स्थिति और कॉरपोरेट सेक्टर में बढ़ती उधारी। निजी बैंक भी इसी रफ्तार में आगे बढ़ रहे हैं और उनमें भी 11–13% की ग्रोथ संभव है। खासकर रिटेल लोन (होम लोन, पर्सनल लोन), MSME सेक्टर की मजबूत मांग और संतुलित कॉरपोरेट एक्सपोजर इनकी ग्रोथ को सहारा दे रहे हैं।
वहीं छोटे वित्त बैंक और सहकारी बैंक थोड़े सतर्क रुख में दिखाई दे रहे हैं। इनकी लोन ग्रोथ 7% से 9% के बीच रहने का अनुमान है, क्योंकि ये बड़े उद्योगों को कम कर्ज देते हैं और ज्यादा फोकस छोटे कारोबार और ग्रामीण क्षेत्रों पर होता है। विदेशी बैंकों के लिए भी 11–13% की मध्यम ग्रोथ का अनुमान है, लेकिन उनकी रणनीति काफी हद तक वैश्विक आर्थिक हालात, तरलता और निवेश प्राथमिकताओं पर निर्भर करेगी।
सेक्टर के हिसाब से देखें तो रिटेल लोन सबसे आगे रहने वाला है, जहां डबल डिजिट ग्रोथ की उम्मीद है। इसके अलावा कृषि क्षेत्र में भी 9–13% तक कर्ज बढ़ सकता है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत है। कुल मिलाकर यह ट्रेंड बताता है कि भारत की अर्थव्यवस्था में मांग धीरे-धीरे मजबूत हो रही है और बैंकिंग सिस्टम भी उद्योग, किसानों और आम उपभोक्ताओं को सपोर्ट करने के लिए तैयार है। हालांकि यह ग्रोथ तेज उछाल वाली नहीं होगी, बल्कि संतुलित और टिकाऊ तरीके से आगे बढ़ेगी—जो लंबे समय में ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकती है।
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