अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में सोमवार को बड़ी हलचल देखने को मिली, जहां Brent Crude और WTI Crude दोनों की कीमतों में 5% से ज्यादा की तेज उछाल दर्ज की गई। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह Strait of Hormuz को लेकर बढ़ता तनाव है, जो वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम मार्ग माना जाता है। यह जलडमरूमध्य दुनिया की करीब 20% तेल आपूर्ति का रास्ता है, इसलिए यहां किसी भी तरह का संकट सीधे कीमतों को प्रभावित करता है।दरअसल, United States और Iran के बीच हालात फिर बिगड़ते नजर आ रहे हैं। अमेरिका द्वारा एक ईरानी मालवाहक जहाज को जब्त किए जाने के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए। इसी बीच खबरें आईं कि इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर हमले या रुकावटें बढ़ रही हैं, जिससे सप्लाई चेन बाधित होने का खतरा बढ़ गया है।
हालांकि कुछ दिन पहले सीजफायर और रास्ता खुला रखने की उम्मीद जगी थी, लेकिन स्थिति अचानक पलट गई। Donald Trump के बयान के बावजूद जमीनी हालात स्थिर नहीं हो पाए और जहाज मालिकों में डर फिर से बढ़ गया है। यही वजह है कि कई टैंकर ऑपरेटर्स इस रास्ते से गुजरने में हिचक रहे हैं, जिससे रोजाना 10–11 मिलियन बैरल कच्चा तेल फंसा हुआ बताया जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि अभी बाजार असली सप्लाई-डिमांड से ज्यादा खबरों और बयानों पर प्रतिक्रिया दे रहा है। लेकिन हकीकत यह है कि जब तक Strait of Hormuz पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं होता, तब तक तेल की सप्लाई सामान्य होना मुश्किल है। जहाज कंपनियां भी बिना पूरी सुरक्षा के जोखिम नहीं लेना चाहेंगी।
मौजूदा हालात में ईरान ने बातचीत के अगले दौर से खुद को अलग कर लिया है, जबकि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी जारी रखी है। इससे साफ है कि तनाव जल्द खत्म होने वाला नहीं है। अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है, जिसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों और आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।
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