एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) को लेकर कुछ समय पहले तक यह डर जताया जा रहा था कि यह मोबाइल ऐप्स की दुनिया को खत्म कर देगा, क्योंकि लोग सीधे एआई चैटबॉट्स और एजेंट्स से काम करने लगेंगे। लेकिन 2026 की शुरुआत में आई रिपोर्ट्स इस धारणा को पूरी तरह गलत साबित करती नजर आ रही हैं। मार्केट इंटेलीजेंस फर्म Appfigures के अनुसार, इस साल की पहली तिमाही में नई ऐप्स के लॉन्च में जबरदस्त उछाल देखने को मिला हैकुल मिलाकर करीब 60% की सालाना वृद्धि दर्ज की गई। खास बात यह है कि Apple के App Store पर ऐप्स लॉन्च 80% तक बढ़ गए, जबकि Google के Google Play Store पर भी इसी तरह की तेजी देखी गई।
असल में एआई ने ऐप्स को खत्म नहीं किया, बल्कि उन्हें बनाना बेहद आसान बना दिया है। पहले जहां ऐप डेवलपमेंट के लिए गहरी तकनीकी जानकारी जरूरी होती थी, अब एआई टूल्स की मदद से कम अनुभव वाले लोग भी अपने आइडिया को ऐप के रूप में लॉन्च कर पा रहे हैं। यही वजह है कि बड़ी संख्या में नए डेवलपर्स इस क्षेत्र में आ रहे हैं और ऐप स्टोर्स पर “नई ऐप्स की बाढ़” जैसी स्थिति बन गई है।
अगर कैटेगरी की बात करें, तो गेमिंग ऐप्स अब भी सबसे आगे हैं, लेकिन इस बार यूटिलिटी ऐप्स ने जोरदार छलांग लगाते हुए दूसरा स्थान हासिल किया है। लाइफस्टाइल ऐप्स तीसरे नंबर पर पहुंच गई हैं, जबकि प्रोडक्टिविटी ऐप्स ने टॉप-5 में जगह बनाकर चौथा स्थान हासिल किया है। हेल्थ और फिटनेस ऐप्स भी लगातार लोकप्रिय बनी हुई हैं और पांचवें स्थान पर हैं।
डिमांड के लिहाज से भी एआई ने बड़ा बदलाव किया है। एआई चैटबॉट्स, कंटेंट जनरेशन टूल्स और इमेज क्रिएशन ऐप्स की मांग तेजी से बढ़ी है। यूजर्स नई-नई एआई आधारित सुविधाओं को आजमाने के लिए इन ऐप्स को तेजी से डाउनलोड कर रहे हैं। इसका सीधा फायदा डेवलपर्स को मिल रहा हैउनकी कमाई में भी इजाफा हुआ है, जिससे वे और ज्यादा ऐप्स बनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
कुल मिलाकर, एआई ने ऐप इंडस्ट्री को खत्म करने के बजाय उसे नई ऊर्जा दी है। यह तकनीक अब सिर्फ बड़े टेक कंपनियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि आम लोगों के लिए भी इनोवेशन के दरवाजे खोल रही है और यही वजह है कि आने वाले समय में ऐप इकोसिस्टम और भी तेजी से बढ़ता नजर आ सकता है।
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